स्थलमंडल lithosphere

स्थलमंडल

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http://fkrt.it/DvnHdTuuuN

  • स्थलमंडलया स्थलमण्डल (अंग्रेज़ी: lithosphere) भूगोल और भूविज्ञान में किसी पथरीले ग्रह या प्राकृतिक उपग्रह की सबसे ऊपरी पथरीली या चट्टान निर्मित परत को कहते हैं। पृथ्वी पर इसमें भूपटल (क्रस्ट) औरभूप्रावार (मैन्टल) की सबसे ऊपर की परत शामिल हैं जो कई टुकड़ों में विभक्त है और इन टुकड़ों को प्लेटकहा जाता है।
  • प्लेटों से बनी पृथ्वी की संरचना का सबसे ऊपरी हिस्सा जो विवर्तनिक प्लेटों की गतिविधियों से संबंद्ध रहता है।
  • यह पृथ्वी की कठोर भूपर्पटी की सबसे ऊपरी सतह है।
  • इसकी मोटाई महाद्वीपों और महासागरों में भिन्न-भिन्न होती (35-50) किमी. महाद्वीपों में तथा 61-12 किमी. समुद्रतल में)।
  • स्थलमण्डलभूपृष्ठ पर पाए जाने वाले ठोस शैल पदार्थों की परतें हैं। यह जीवमण्डल का महत्त्वपूर्ण भाग है। इसका निर्माण तत्वों, खनिजों, शैलों तथा मिट्टी से हुआ है। तत्व शुद्ध पदार्थ है जिसके अन्तर्गत लोहा, तांबा, निकल, सोना, चांदी, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन आदि आते हैं। खनिजों में बॉक्साइट, डोलोमाइट, हेमेटाइट, फेलस्पार आदि आते हैं। शैलों के रूप में आग्नेय शैल, अवसादी शैल, रूपांतरित शैल तथा मिट्टी के रूप में जलोढ़ , दोमट, लैटेराइट मिट्टी आदि शामिल है।

·         स्थलमण्डल का क्षेत्रफल

  • स्थलमण्डल सम्पूर्णपृथ्वी के क्षेत्रफल का 29% है। पृथ्वी के अन्दर तीन मण्डल पाए जाते हैं। ऊपरी मण्डल को भूपर्पटी अथवा क्रस्ट कहा जाता है। इसकी मोटाई 30 से 100 किमी तक होती है। महाद्वीपों में इसकी मोटाई अधिक जबकि महासागरों में या तो क्रस्ट होती ही नहीं अगर होती है तो बहुत पतली होती है। क्रस्ट का ऊपरी भाग स्थलमण्डल का प्रतिनिधित्व करता है। जिन पदार्थों से क्रस्ट का निर्माण होता है वे जैव समुदाय के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। क्रस्ट का निर्माण मुख्यतः लोहा, ऑक्सीजन, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, निकिल, गंधक, कैल्शियम तथा ऐलुमिनियम से होता है। क्रस्ट में एल्युमिनियम तथा सिलिका की मात्रा अधिक होती है। क्रस्ट के नीचे के दूसरे मण्डल को मैण्टिल कहा जाता है जिसकी निचली सीमा 2900 किमी से पृथ्वी के केन्द्र तक है।

चट्टानें

  • पृथ्वी की सतह का निर्माण करने वाले पदार्थ चट्टानें या षैल कहलाते हैं।
  • बनावट की प्रक्रिया के आधार पर चट्टानों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है।
  1. आग्नेय चट्टान
  • ये चट्टानें भी चट्टानों में सबसे ज्यादा (95%) मिलती है।
  • इनका निर्माण ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाले लावा (Magma) के पृथ्वी के अंन्दर या बाहर ठंडा होकर जम जाने से होता है।
  • ये प्राथमिक मौलिक चट्टनें कहलाती है क्योंकि बाकी सभी चट्टानों का निर्माण इन्हीं से होता है।
  • उत्पत्ति के आधार पर ये तीन प्रकार की होती है-
  • ग्रेनाइट:इन चट्टानों के निर्माण से मैग्मा धरातल के ऊपर न पहुँचकर अंदर ही जमकर ठोस रूप धारण कर लेता है जिसके ठंडा होने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है क्योंकि अन्दर का तापमान अधिक होता है और बनने वाले क्रिस्टल काफी बड़े होते हैं।
  • बेसाल्ट:ये समुद्री सतह पर पाये जाते हैं।
  • ज्वालामुखी:ज्वालामुखी विस्फोट के कारण मैग्मा के बाहर आकर जमने से चट्टानें बनती है।
  1. अवसादी चट्टान
  • ये प्राचीन चट्टानों के टुकड़ों जीव अवषेषों तथा खनिज के परतदार एवं संगठित जमाव से निर्मित होती है।
  • ये भूपष्ष्ठ का केवल 5 प्रतिषत होती है परन्तु भूपष्ष्ठ के 75 प्रतिषत भाग पर पै$ली रहती हैं।
  • इन्हें परतदार चट्टानों के नाम से भी जाना जाता है।
  • जिप्ससए चीका मिट्टीए चूने का पत्थरए कोयला (एन्थ्रेसाइट के अलावा), बालुका पत्थरए षैलए ग्रेवल आदि अवसादी चट्टानों के उदाहरण हैं।
  1. रूपान्तरित चट्टान
  • अवसादी एवं आग्नेय चट्टनों में ताप, दबाव और रासायनिक क्रियाओं आदि के कारण परिवर्तन हो जाता है। इससे जो चटट्नें बनती हैं वे रूपान्तरित या परिवर्तित चट्टानें कहलाती हैं।
मूल चट्टान रूपांतर
ग्रेनाइट नाइस (Gneiss)
बेसाल्ट ऐम्फी बोलाइट
बालू पत्थर क्वार्टजाइट
चूना पत्थर संगमरमर
शेल स्लेट
कोयला ग्रेफाइट, हीरा
स्लेट शिष्ट (Schist)
शिष्ट फायलाइट

पर्वत:

  • धरातल के 27 % भाग पर पर्वतों का विस्तार है।
  • आयु के आधार पर पर्वतों को मुख्यतः दो भागों में विभक्त किया जा सकता है –
  1. प्राचीन पर्वत:लगभग तीन करोड़ वर्ष से पहले हुई महाद्वीप विस्थापन से पहले के पर्वत प्राचीन पर्वतों में आते हैं।जैसे – पेनाइन (यूरोप), अल्पेषियन (अमेरिका), अरावली (भारत) आदि। अरावली विश्व्व के सबसे प्राचीन पर्वत माने जाते हैं।
  2. नवीन पर्वत:जो पर्वत महाद्वीपीय विस्थापन के बाद अस्तित्व में आये हैं, वे नवीन पर्वतों की श्रेणी में आते हैं, जैस – हिमालय, राकी, एण्डीज, आल्पस आदि। हिमालय विश्व्व के सबसे नवीन पर्वत माने जाते हैं।
  • उत्पत्ति के आधार पर पर्वत मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं-

वलित या मोड़दार पर्वत

पृथ्वी की विवर्तनिक षक्तियों जैसे – दबाव, संपीड़न, उभार, तनाव आदि के कारण चट्टानों के स्तर में व्यापक मोड़ या वलन का विकास होने से ये पर्वत बनते हैं।

विश्व्व के प्रमुख पर्वत:

हिमालय आल्पस, राकी, एण्डीज, यूराल, एटलस आदि बड़ी श्रेणियों के पर्वत वलित पर्वत ही है।

अवरोधी पर्वत

  • ये पृथ्वी के धरातल के ऊपर उठने या नीचे धँसने की वजह से बनते हैं।
  • धरातल के नीचे लावा के ठंडा होने की वजह से तनाव व खिंचाव के कारण धरातल में भ्रंष व दरारों का विकास हो जाताहै जिससे वु$छ भाग उ$पर उठ जाता है और कुछ धँस जाता है।
  • ऊपर उठा भाग भ्रंषोत्थ पर्वत तथा धसा भाग भ्रंस घाटी कहलाता है।
  • नर्मदा, ताप्ती व दामोदर घाटी (भारत), वास्जेस व ब्लैक, फारस्ट पर्वत (यूरोप), वासाच रेंज (अमेरिका), साल्ट रैंज (पाकिस्तान) आदि मुख्य ब्लाक पर्वत हैं।

अवशिष्ट पर्वत:

  • अत्यधिक अपरदन या अनाच्छादन के कारण पर्वत अपने प्रारम्भिक स्वरूप को खोकर अवषिष्ट पर्वत का रूप धारण कर लेते हैं।
  • विन्ध्याचल, सतपुड़ा, नीलगिरी, पारसनाथ, पूर्वी घाट, पष्चिमी घाट (भारत), हाइलैण्ड्स (स्काटलैण्ड), कैटस्किल (न्यूयार्क) आदि इस श्रेणी के पर्वत हैं।

संग्रहित पर्वत

  • इनका निर्माण ज्वालामुखी से निःसृत पदार्थों (मिट्टी, मलबा, लावा आदि) के जमाव से होता है। अतः ये ज्वालामुखी पर्वत भी कहलाते हैं। ओजस डेल सलाडो विष्व का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी (6885 मी0) है। यह एण्डीज पर्वतमाला में चिली में स्थित है।

रेगिस्तान:

पृथ्वी का वह क्षेत्रा जहाँ एक वर्ष में औसतन 25 सेमी से कम वर्षा होती है, मरूस्थल कहलाता है। सामान्यतः मरूस्थल गर्म स्थल होते हैं, परन्तु महाद्वीपों वे$ आंतरिक भाग में पाये जाने वाले मरुस्थल हमेशा गर्म नहीं होते हैं। विष्व वे$ वु$छ प्रमुख मरुस्थल निम्न हैः

कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :

  1. स्थल मंडल किसे कहते हैं ?
    पृथ्वी की संपूर्ण बाहरी परत जिस पर महाद्विप और महासागर स्थित हैं ।

    2.
    पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर स्थल है ?
    29 प्रतिशत

    3.
    पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर जल है ?
    71 प्रतिशत

    4.
    पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में कितने प्रतिशत जल है ?
    61 प्रतिशत

    5.
    पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध में कितने प्रतिशत जल है ?
    -81 प्रतिशत

    6.
    पृथ्वी पर अधिकतम ऊंचाई वाली जगह कौन-सी है ?
    माउंट एवरेस्ट

    7.
    पृथ्वी पर सबसे अधिकतम गहराई किस स्थान की है ?
    मेरियाना की खाई में चेलेंजर गर्त (प्रशांत महासागर)

    8.
    चट्टान किसे कहते हैं ?
    पृथ्वी की सतह के कठोर भाग को चट्टान कहते हैं ।

    9.
    गहराई में वृद्धि के अनुसार महाद्विपीय भूपटल की परतों का सही क्रम क्या है
    परतदार- ग्रेनाइट- बेसाल्ट

    10.
    बनावट की प्रक्रिया के आधार पर चट्टान को कितने भागों में बांटा गया है ?
    तीन भाग- 1. आग्नेय 2. अवसादी और 3. कायांतरित

    11.
    आग्नेय चट्टान किससे बनती है ?
    मैग्मा या लावा के जमने से ।

    12.
    किन चट्टानों में जीवाश्म नहीं पाए जाते ?
    आग्नेय चट्टान

    13.
    आग्नेय चट्टानों में कौन से खनिज अधिक पाए जाते हैं ?
    लोहा तथा मैग्नीशियम युक्त सिलिकेट

    14.
    रेगुर किसे कहते हैं ?
    काली मिट्टी

    15.
    काली मिट्टी का निर्माण कैसे होता है ?
    बेसाल्ट चट्टानों के क्षरण से ।

    16.
    झारखंड के कोडरमा में पाए जाने वाला अभ्रक किन चट्टानों में पाया जाता है ?
    पैग्माटाइड

    17.
    चट्टानों की कठोरता का मापन किससे किया जाता है ?
    मोह स्केल

    18.
    पृथ्वी के आंतरिक भाग में पिघले हुए मैग्मा से निर्मित चट्टानों को किन नामों से जाना जाता है ?
    डाइक, सिल, लैकोलिथ, बैथोलिथ, लैपोलिथ, फैकोलिथ

    19.
    झारखंड के सिंहभूम जिले में किस आंतरिक आग्नेय चट्टान की प्रचूरता है
    डाइक

    20.
    एक मीटर से कम मोटाई वाले सिल को क्या कहते हैं ?
    शीट

    21.
    जब मैग्मा गुबंद या लैंस आकार में जमता है तो उसे क्या कहते हैं ?
    लैकोलिथ

    22.
    आधार पर मैग्मा के जमने से जो चट्टान बनती है उसे क्या कहते हैं ?
    बैथोलिथ । जैसे- अमेरिका का इदाहो बैथोलिथ और पश्चिमी कनाडा का कोस्ट रेज बैथोलिथ ।

    23.
    जब मैग्मा जमकर तश्तरीनुमा आकार ग्रहण कर लेता है तब उसे क्या कहते हैं ?
    लैपोलिथ । यह चट्टानें दक्षिणी अमेरिका में मिलती हैं ।

    24.
    जब मैग्मा लहरदार आकृति में जमता है तो उसे क्या कहते हैं ?
    फैकोलिथ
    25. अवसादी या परतदार चट्टानें किसे कहते हैं ?
    प्रकृति के कारकों द्वारा निर्मित छोटी-छोटी चट्टानें किसी स्थान पर जमा होती हैं और बाद के काल में दबाव या रसायनिक प्रतिक्रिया के द्वारा परत जैसी ठोस रूप में निर्मित हो जाती हैं इसे अवसादी चट्टानें कहते हैं । जैसे- बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, स्लेट, नमक की चट्टान, शेलखड़ी आदि ।

    26.
    किन चट्टानों में जीवाश्म पाया जाता है ?
    अवसादी चट्टान

    27.
    किन चट्टानों में लौह अयस्क, फास्फेट, कोयला एवं सीमेंट बनाने की चट्टानें पाई जाती हैं ?
    अवसादी चट्टान

    28.
    खनिज तेल किन चट्टानों में पाया जाता है ?
    अवसादी चट्टान

    29.
    किन नदी बेसीनों की अवसादी चट्टानों में कोयला पाया जाता है ?
    दामोदर, महानदी तथा गोदावरी

    30.
    आगरा का किला तथा दिल्ली का लाल किला किस पत्थर का बना है ?
    बलुआ पत्थर नामक अवसादी चट्टान

    31.
    कायांतरित चट्टान किसे कहते हैं ?
    ताप, दाब और रसायनिक क्रियाओं के कारण आग्नेय एवं अवसादी चट्टानों से कायंतरित चट्टानों का निर्माण होता है

सन्दर्भ :

https://hi.wikipedia.org/wiki/स्थलमण्डल

iasexamportal.com/civilservices/courses/hindi/ias/sthalmandal

http://hindi.indiawaterportal.org/water_words/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A5%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%B0

http://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2&redirect=no

 

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