संविधान का अर्थ

संविधान का अर्थ

आपने संविधान शब्द कई बार सुना होगा इस शब्द का प्रयोग कई संदर्भो में किया जाता है, जैसे राज्य या राष्ट्र का संविधान, संगठन, संस्था या यूनियन का संविधान, खेल क्लब का संविधान, गैर सरकारी संस्था का संविधान, किसी कम्पनी का संविधान आदि क्या संविधान शब्द का अर्थ इन विभिन्न संदर्भो में एक समान है? नहीं ऐसा नहीं है सामान्यत: संविधान शब्द का प्रयोग नियम और कानूनों के एक ऐसे समूह के लिए किया जाता है जो ज्यादातर लिि होते हैं तथा जो किसी स्था, गठन या कम्पनी की संरचना और कार्यप्रणाली को परिभाषित तथा नियमित करते है लेकिन जब इसका प्रयोग राज्य या राष्ट्र के संदर्भ में होता है तो संविधान का अर्थ मूल सिद्धांतों, आधारभूत नियमों तथा स्थापित परम्पराओं का समूह है यह राज्य के विभिन्न पहलुओं सरकार के तीन अंगोंकार्यकारिणी, विधायिका एवं न्यायपालिका के अंतर्गत प्रमुख संस्थाओं की संरचना, अधिकार तथा कार्यो की पहचान करता है, परिभाषित करता है और नियमित करता है यह नागरिकों के अधिकारों एवं उनकी स्वतन्त्रताओं का प्रावधान करता है और वैयक्तिक नागरिक तथा राज्य और सरकार के बीच के संबंधों को स्पष्ट करता है

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संविधान लिखित या अलिखित हो सकता है लेकिन इसमें देश के मूलभूत कानून समाविष्ट होते हैं यह सर्वोच्य एवं परम मान्य ग्रन्थ होता है कोई भी निर्णय या कार्यवाही जो संविधान के अनुरूप नहीं हो वह असवैधानिक और गैरकानूनी मानी जाती है संविधान सत्ता के दुरुपयोग को टालने के लिए सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ लगाता है इसके अतिरिक्त, यह एक स्थिर नहीं बल्कि एक जीवन्त दस्तावेज होता है, क्योंकि इसे अद्यतन बनाए रखने के लिए समयसमय पर संशाधित करना आवश्यकता होता है इसकी नमनशीलता लोगों की बदलती आकांक्षाओं, की जरूरतों तथा समाज में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार इसे परिवर्तित होते रहने योग्य बनाती है

क्या आप जानते हैं

अधिकतर लोकतांत्रिक देशों के संिधानों से भिन्न ब्रिटेन के संविधान को अलिखित संविधान की श्रेणी ें रखा जाता है, क्योंकि इसका ज्यादातर हिस्सा अलिखित है जिसका संहिताकरण नहीं किया गया इसका निर्माण संक्त राज्य अमेरिका और भारत के संविधान की तरह एक पूर्ण दस्तावेज के रूप में नहीं किया गया था भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान लिखित संविधान हैं

भारतीय विधान

क्या आपने भारतीय संविधान का दस्तावेज देखा है? क्या आप निम्नांकित चित्र में उसके मुखपृष्ठ को पहचान सकते हैं? यदि आपने इसे देखा है या आपको इसे देखने का मौका मिलता है तो आप इस बात से सहमत होंगे कि यह बहुत ही बड़ा है वास्तव में, भारत का संविधान दुनिया के सभी संविधानों में सबसे लम्बा संविधान है, इसका निर्माण एक संविधान सभा के द्वारा किया गया था . इसके निम्न कारण रहे होंगे –

() लंबे समय तक चले स्वतंत्रता आंदोलन द्वारा पैदा की गई आकांक्षाएँ

() ब्रिटिश शासन के दौरान हुए राजनीतिक और संवैधानिक बदलाव;

() गांधीवाद, के नाम से लोकप्रिय महात्मा गांधी विचारधारा;

() देश की सामाजिक संस्कृति सोच और परिवेश; तथा

() दुनिया के लोकतान्त्रिक देशों में संविधानों के क्रियान्वयन के अनुभव

भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ तब से इस दिन को प्रत्येक वर्ष गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है

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क्या आप जानते हैं

संविधान सभा ने 9 दिसम्बर, 1946 को संविधा बनाने का कार्य प्रारम्भ किया 11 दिसम्बर 1946 को डा. राजेन्द्र प्रसाद इसके अध्यक्ष निर्वाचित हुए डा. बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे दो वर्ष 11 महीने 18 दिन अवधि में संविधान सभा 166 दिन बैठक हुई संविधान निर्माण 26 नवम्बर 1949 को पूरा हुआ तथा उस दिन संविधान सभा ने भारत के संविधान के प्रारूप को अंगीकृत किया

भारत का संविधान भारत की राजनीतिक व्यवस्था के सभी पहलुओं के साथसाथ इसके आधारभूत उद्देश्यों को भी परिभाषित है इसके प्रावधान () भार का भूक्षेत्र () नागरिकता () मौलिक अधिकार () राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक कर्त्तव्य () केन्द्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकारों की संरचना और कार्यप्रणाली तथा () राजनीतिक व्यवस्था के कई अन्य पक्ष से सम्बन्धित हैं यह भारत को एक सम्प्रभुत्व लोकतांत्रिक समाजवादी तथा पंथनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में परिभाषित करता हैं इसमें सामाजिक बदलाव तथा नागरिक और राज्य के आपसी संबंधों को परिभाषित करने संबंधी प्रावधान हैं

संवैधानिक मूल्य

किसी भी देश का संविधान अनेक उद्देश्यों को पूरा करता है कुछ ऐसे आदर्शों को निर्धारित करता है, जो ऐसे देश का आधार बनते हैं जिसमें हम नागरिकों की तरह रहने की आकांक्षा रखते हैं सामान्यत एक देश लोगों के विभिन्न प्रकार के समुदायों से बनता है यह आवश्यक नहीं की ये लोग सभी मुद्दों पर आवश्यक रूप से एकमत होते लेकिन वे कुछ आस्थाओं में साझेदारी करते हैं संविधान सिद्धान्तों, नियमों तथा प्रक्रियाओं का एक ऐसा सेट प्रस्तुत करता है, जिसके आधार पर आम सहमति विकसित है लोग चाहते हैं कि दे का शासन इसी सहमति के आधार पर संचालित हो तथा समाज आगे बढ़े यह सहमति आदर्शो पर भी बनती है, जिन्हें बनाए रखा जाए भारतीय संविधान में भी कुछ केन्द्रिक सांविधानिक मूल्य हैं जो इसके विभिन्न अनुच्छेदों तथा प्रावधानों में अभिव्यक्त होते हैं

लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि मूल्यशब्द का अर्थ क्या होता है? आप तुरंत यह कहेंगे कि सत्य, अहिंसा, शान्ति, सहयोग, ईमानदारी, आदर तथा दया मूल्य हैं आप ऐसे अनेक मूल्यों की सूची बना सकते हैं वास्तव में आम समझ के अनुसार मूल्य ऐसी चीज है जो बहुत समाज के अस्तित्व के लिए वांछनीय है संविधान में सभी सार्वभौम, मानवीय तथा लोकतांत्रिक मूल्य निहित हैं

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